सिनेमा समाज पर छोड़ रहा गहरा असर रहा, बढ़ रहा शॉर्ट फिल्मों का क्रेज

नयी दिल्ली: सिनेमा का हमारे समाज पर शुरू से ही गहरा असर रहा है. सिनेमा, फ़िल्में, डाक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म आदि समाज के लिए एक आईने का रूप होती है. पहली फिल्म “राजा हरिश्चंद्र” से लेकर आज तक फिल्म इंडस्ट्री उसी जोश और उमंग के साथ आगे बढ़ रही है.

बड़ी फिल्म और फीचर फिल्म के साथ-साथ पिछले कुछ सालों में शॉर्ट फिल्म का कांसेप्ट उभर कर आया हैं. जिसमे कम समय में समाज को एक अच्छा सन्देश देने का काम किया. शुरूआती दौर में तो इस कांसेप्ट की आलोचना हुई लेकिन धीरे-धीरे इसने पूरी दुनिया में अपना एक अलग स्थान बना लिया.

आज के समय में हर छोटा बड़ा फिल्म-मेकर अपनी शॉर्ट फिल्म्स के साथ बाज़ार में आ रहा है. शॉर्ट फिल्म्स की सबसे ख़ास बात होती है कि इसका बजट कम होता है और इससे नए-नए टैलेंट को उभार कर सामने आने का मौका मिलता हैं. शॉर्ट फिल्म के इसी दौर में “अनुराग कश्यप”, “सुजोय घोष”, “मनोज बाजपेयी” और मधुर भंडारकर जैसे लोगों ने शोर्ट फिल्म में हो रही प्रतियोगिता और खासतौर पर भारत में इसके महत्त्व को और भी तगड़ा कर दिया है.

आज के भागते- दौड़ते व्यस्त जीवन में शॉर्ट फिल्म का एक अलग ही महत्त्व है, ये महत्त्व उन लोगों के लिए भी रखता है जो बॉलीवुड में आने के हसीं सपने देखा करते हैं. शॉर्ट फिल्म हर उस छोटे- बड़े फिल्म-मेकर , एक्टर, एक्ट्रेस, डायरेक्टर, सिनेमेटोग्राफर और एडिटर को मदद करता है जो लगातार इस क्षेत्र में अपने बड़े सपने संजोने में लगा हुआ हैं .

इसी के साथ-साथ फिल्म फेस्टिवल का कल्चर भी बढ़ता जा रहा है, बड़े-बड़े शहरों में लगातार फिल्म फेस्टिवल मनाये जा रहे हैं जिससे नए और अच्छे टैलेंट को प्रोत्साहन मिलता है. बताया जाता है कि इसी तरह विचित्रा फिल्म्स राष्ट्रीय स्तर पर “रानी लक्ष्मी बाई फिल्म फेस्टिवल, झाँसी 2018” का आयोजन कर रही हैं.

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