Video: बरेली कालेज में ‘कैद’ रहे संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर, अनुयायियों ने मना ली जयंती

संजीव शर्मा

बरेली: आजाद भारत में हर जगह अंबेडकर जयंती मनाई जा रही है. राजनीतिक वीरवल अंबेडकर के नाम पर वोट वैंक जुटाने में लगे हैं. बैसे तो संविधान के निर्माता कहे जाने वाले डॉ. अंबेडकर को दलितों का मसीहा कहा जाता है. लेकिन हम आपकों उस वीडियो से रूबरू कराएंगे.

जिसे देखकर शायद अंबेडकर नाम की राजनीति करने वालों को शर्मसार होना पड़ सकता है. यूपी के बरेली कालेज में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पिछले कई सालों से सजा काट रही है. कालेज में भी आये दिन सेमीनार होते हैं.

लेकिन इतना लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी किसी राजनीतिक दल या किसी समाजसेवी ने प्रतिमा को आजाद कराने के बारे में नहीं सोचा. सबसे बड़ी बात है कि जयंती वाले दिन भी वह लोहे के पिंजड़े में कैद रहे. आखिर सबाल खड़ा हो गया है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर को कौन कराएगा आजाद.

डॉ. भीमराव अंबेडकर, राष्ट्रपिता जैसे महापुरुष भी हैं कैद

बरेली कालेज में लगी संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ राष्टपिता महत्मा गाँधी सहित दो और महा पुरुषो की प्रतिमाए पिंजरे के अंदर ताले कैद हैं. कालेज प्रशासन इन महापुरुषों को पिंजरे में बंद रखने की बात को तो गलत मान रहे है. लेकिन सुरक्षा का हवाला देकर अपना पलड़ा झाड़ रहे है.

लोहे के पिंजड़े में कैद आजाद भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर हैं. तो दूसरी तरफ राष्टपिता महात्मा गाँधी, स्वामी विवेकानंद और डॉ राममनोहर लोहिया. सभी महापुरुषो की प्रतिमाओं को बरेली कालेज में लोहे के पिंजरे में कैद कर ताला जड़ दिया गया है.

दो साल से कैद हैं महापुरुष

बरेली कालेज में चारो महापुरुषो की प्रतिमाए लगभग दो साल से लोहे के पिंजरे में कैद हैं. किसी ने उन्हें आजाद कराने का प्रयास नहीं किया. जबकि डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर वोट बैंक को संजोने के लिए राजनितिक दल तरह-तरह के प्रोपोगंडा अपना रहे है. लेकिन आजाद कराने के बारे में किसी को ख्याल नहीं आ रहा. अब देखना होगा कि क्या बरेली कालेज में लगी महापुरुषो की प्रतिमाओं को पिंजरे से आजादी मिलेगी या नहीं.

कहाँ गए अंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाले

पिछले 2 सालों से पिंजरे में कैद संविधान की किताब देखकर उन लोगों पर शर्म आती है जो अंबेडकर के नाम पर राजनीति करते हैं. बरेली कालेज में भी दलित संगठन है जो बाबा साहेब को अपना मसीहा मानते हैं लेकिन आज तक किसी भी नेता ने ये जानने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर संविधान निर्माता और दलितों के मसीहा को आखिर कैद में क्यों रखा गया है.

यहाँ भी कोई दिला दे आजादी

बदायूं ने भाजपा के एक दिवसीय उपवास के दौरान आंवला सांसद धर्मेन्द्र कश्यप व सदर विधायक महेश चन्द्र गुप्ता ने गद्दी चौक स्थित अंबेडकर पार्क में स्थापित बाबा साहेब की प्रतिमा लोहे के पिंजरे से आजादी दिलाई थी. देखना होगा कि यहाँ बाबा साहेब को कोई आजादी दिलाता है या नहीं.

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