भारत बंद: बरेली में आरक्षण के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, किया ये काम !

बरेली. नौकरियों और शिक्षा में जाति आधारित आरक्षण के विरोध में मंगलवार को बरेली में सवर्ण संगठनों द्वारा रैली निकाली गई. कलेक्ट्रेट पहुँच संगठन के लोगों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा.

कहा कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट मामले में जाँच पूर्व गिरफ्तारी पर रोक लगाने का निर्णय दिया था. जिसके बाद देश के लोगों ने राहत की साँस ली थी.

लेकिन सत्ता के लालच में पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरूद्ध दलित समुदाय को भड़काने का काम किया. जिसके बाद दलित समुदाय ने 2 अप्रैल को भारत बंद का आव्हान किया. इस दौरान 13 लोगों की जान चली गई और बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय और निजी संपत्ति का नुक्सान हुआ. साथ ही सामजिक एकता में दरार बढ़ गई.

ज्ञापन के दौरान उन्होंने कहा कि केवल एक ही समुदाय विशेष के लोगों की वकालत करना व दूसरे समुदाय के निर्दोष लोगों की चिंता न करना संविधान की मूल भावनाओं का घोर उलंघन है.

यह की मांग

ज्ञापन देने वालों ने राष्ट्रपति से 20 मार्च के बाद भड़काऊ भाषण, हिंसा, आगजनी, लूटपाट और धमकी दिए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किये जाने की मांग की है. साथ ही सरकार और उनके मंत्रियों सांसद सदस्यों को भेदभाव से घ्रणा फैलाने से रोके जाने की जरूरत बताई.

यह संगठन रहे मौजूद

कार्यक्रम के दौरान अखिल भारतवर्षीय ब्राहमण महासभा, अखिल भारतीय क्षत्रीय महासभा, वैश्य समाज, कायस्थ समाज, समाज सेवा मंच, समानता मंच आदि संगठन रहे. ज्ञापन देने के दौरान त्रिभुवन शर्मा, सरदार दलजीत सिंह, कासिम शमसी, अभयपाल सिंह, गजेन्द्र पांडेय, प्रशांत शर्मा, अनिल सक्सेना, हरिओम गौतम, संदीप मिश्रा, हितेंद्र भारती, हर्ष साहनी, रजनी सक्सेना, सुधा सक्सेना, अभयपाल सिंह समेत लोग रहे.

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