आपको मालूम है कि भारत में कहाँ हुआ हनुमानजी का जन्म और क्या है महत्ता ?

देश व प्रदेश में 31 मार्च को हनुमानजी का जन्मदिन धूम धाम से मनाया जा रहा है. भक्त सुबह से लेकर आज विधिवत रूप से पूजा पाठ के साथ नगरों में झांकियां निकाल रहे हैं. भगवान हनुमान के जन्मदिन पर आपको यह भी जानना जरूरी है कि आखिर हनुमानजी का जन्म स्थान कहां है.

हम बात कर रहे हैं, मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित टिहरका गांव की. यहां की पौराणिक मान्यता और त्रेता युग के किस्सों में हनुमानजी के जन्म से जुड़ी बातें बताई जाती हैं. मान्यता है कि इस गांव में हनुमानजी ने जन्म लिया था.

इस गांव में हनुमानजी का प्राचीन मंदिर है, इस मंदिर के बारे में पौराणिक मान्यता है कि भगवान हनुमानजी ने इसी गांव में जन्म लिया था.

इसी पावन पवित्र धरा पर चैत्र शुक्ल पक्ष दिन मंगलवार को मारुतिनंदन का जन्म हुआ. मान्यता है कि अंजनी माता अपने पति केशरी के साथ सुमेरु पर्वत पर निवास करती थीं.

जब कई सालों तक माता अंजनी को संतान प्राप्त नहीं हुई तो मतंग ऋषि के कहने पर टिहरका गांव के पर्वत पर उन्होंने करीब 7 हजार सालों तक निर्जल तप किया. उसी समय से बिल्व की आकृति का पर्वत अडिग खड़ा है. इसी पर्वत के नीचे भगवान महादेव का धाम है. माता अंजनी यहाँ तपस्या करके पूर्व दिशा में स्थित आकाश गंगा में स्नान करती थीं. वे दोनों कुंड इस गांव में आज भी मौजूद हैं, जिनका पानी कभी नहीं सूखता है.

दूसरी तरफ मान्यता है कि जब राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिये यज्ञ कराया तब यज्ञ के बाद ऋषि वशिष्ठ ने चारों रानियों को खीर का प्रसाद दिया था. इसी दौरान कैकई के हाथ से प्रसाद का कुछ भाग छीनकर एक चील ले उड़ी थी. रास्ते में तूफान से उस चील से प्रसाद गिर गया था.

उसी समय पवन देव ने पर्वत पर तपस्या कर रही अंजनी माता के हाथ पर वह प्रसाद डाल दिया, जैसे ही माता ने वह प्रसाद ग्रहण किया, हनुमानजी गर्भ में आ गए और इस तरह हनुमानजी ने टिहरका गांव में जन्म लिया.

चाहते है क्रपा तो जरूर करें यह उपाय

1-हनुमानजी को गुलाब की माला चढ़ाएं.

2-हनुमान मंदिर में एक सरसों का तेल और एक शुद्ध घी का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें.

3-हनुमान जयंती पर बजरंगबली को खजूर चढ़ाएं.

4-हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ जरूर करें.

5-मंगलवार के दिन जाएं तो श्रीरामचरितमानस का चौथा अध्याय सुंदरकांड अवश्य पढ़ें.

6-अगर संभव हो तो सुंदरकांड की कथा सुन लेवें.

7-कोशिश रहे कि हनुमान मंदिर जाएं तो केसरी रंग के वस्त्र धारण करके जाएं इससे भगवान होते हैं प्रसन्न.

8-बालाजी को लाल सिंदूर या लाल रंग का चोला चढ़ाएं.

9-मंदिर से निकलने से पहले हनुमानजी के चरणों का सिंदूर मस्तक पर लगाकर निकलें.

10-मंदिर के बाहर बैठे जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा दें.

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